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ट्रांस फैट फ्री भारत बनाएं

ट्रांस फैट हटाओ! दिल बचाओ!

निर्णय निर्माताओं का परिचय:

श्री हर्षवर्धन,
कैबिनेट मंत्री, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
कमरा नंबर 348; ‘ए’ विंग, निर्माण भवन, नई दिल्ली -110011

श्री पवन कुमार अग्रवाल,,
मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ), भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)
एफडीए भवन, कोटला मार्ग, बाल भवन के पास, मंडी हाउस, नई दिल्ली-110002

प्रिय महोदय/महोदया,
मैंने ट्रांस फैट और उससे होने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में पढ़ा और उसको समझा। ट्रांस फैट के आंकड़ों को पढ़ने के बाद मैं आश्चर्यचकित रहा। अब मेरे लिए यह स्पष्ट है कि मैं खाद्य पदार्थों में मौजूद ट्रांस फैट की मात्रा को समझने के लिए सबसे पहले उसके न्यूट्रिशन लेबल को पढ़ूं। मैं अपनी प्लेट पर ट्रांस फैट से भरा खाना नहीं देखना चाहूंगा। मैं एक ट्रांस फैट मुक्त भारत देखना चाहता हूं और हमारा लक्ष्य है कि हम 2022 तक इसको 2% कर दें।

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क्या आप जानते हैं कि ट्रांस-फैट के अधिक सेवन के कारण भारत में अब तक 75,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जो कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है। विश्व स्तर की बात करें तो ट्रांस फैटी एसिड के कारण 5,40,000 मौतें हो चुकी हैं।

ट्रांस फैट या ट्रांस फैटी एसिड (टीएफए) खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरह से पाए जा सकते हैं। प्राकृतिक ट्रांस फैट कुछ पशु उत्पादों और दूध में बहुत कम मात्रा में मौजूद होता है लेकिन इसको हानिकारक नहीं माना जाता है। कृत्रिम ट्रांस फैट एलडीएल कोलेस्ट्रॉल स्तर (खराब कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) को कम करता है। यह हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को भी बढ़ाता है और इससे टाइप II मधुमेह (डायबिटीज) होने का डर भी बना रहता है। ट्रांस फैट जो कि तरल वनस्पति तेलों में हाइड्रोजन को मिलाकर अधिक ठोस बनाने के लिए बनाई जाती है वह वनस्पती, मार्जरीन, बेकरी उत्पाद और तले हुए खाद्य पदार्थों में मौजूद होते हैं।

दूसरी बार इस्तेमाल किये तेल से घर में बनाया गया खाना भी उतना ही हानिकारक होता है जितना ट्रांस फैटी एसिड से। खाने को तलने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वनस्पती तेल भी ट्रांस फैट का प्रमुख स्त्रोत है। बेकरी उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड में भी ट्रांस फैट पाया जाता है। ट्रांस फैट भोजन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि खरीदने से पहले खाद्य लेबल पर पोषण और अन्य सामग्री के बारे में अच्छी तरह से पढ़ लें।

एफएसएसएआई (FSSAI) ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा नियामक, के तहत फैट/ तेल में ट्रांस फैट वजन 1 जनवरी 2021 में 3% (प्रतिशत) और 1 जनवरी 2022 में 2%(प्रतिशत) से अधिक नहीं होना चाहिए।

आइए मिलकर भारत को ट्रांस फैट फ्री बनाने के लिए FSSAI और MoHFW की अपील (पेटिशन) पर हस्ताक्षर कर इस मुहिम में भागीदार बनें।